यादगार पल

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सोमवार, 8 जून 2015

तनहाईयां

जिन्दगी मे  रह-रह कर तनहाईया मिलती हैं
हर मोड़ पर ठहर कर रूसवाईया मिलती हैं
न जाने कब तक ये मंजर चलता रहेगा यारों
इस कठिन डगर पर कठिनाइयाँ मिलती हैं
सफर में उसकी यादों की पंक्तियां मिलती हैं
जिसे पन्नों में बिखेरने की शक्तियां मिलती हैं
शब्दों को लिख कर बिताया करता हूँ यारों
कभी पन्नों पर उभरकर झाँकिया मिलती है
झाँकिया में उसकी धुधलीसी तस्वीर मिलती है
आपस में बिताये लम्हों की लकीर मिलती हैं
इन्हीं लकीरों को मैं जोड़ -जोड़ कर यारों
तैयार करता हूँ तो एक बड़ी जंजीर मिलती है
वो दूर जाने के बाद यादों केरूप में मिलती हैं
कभी-कभी वो आवाज़ों के रूप में मिलती है
ये आवाज़ जब दिल के अन्दर गुँजता हैं यारों
तो ख्यालों और सपनों में बार-बार मिलती है।
जब उस  समय हमसे वो बारम्बार मिलती थी
लगता था  कोई  कली  में फुल खिल रही थी
उस अ को मैं खिलखिलाता देखकर यारों
मेरे हृदय में खुशियों की लहर उठ जाती थी
------@रमेश कुमार सिंह २३-०५-२०१५

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